भारत के प्राचीन क्षत्रिय कोली/शाक्य राजवंश का इतिहास Zee Tv पर भी बताया जा रहा है कोली एक स्वर्ण जाति हे इसका प्रमाण अब सीरियल में भी दिखाया गया |
zee tv serial Gautam Budh ( king Sidharth Goutam )
( कपिलवस्तु के शाक्य - यह गणराज्य नेपाल की तराई में स्थित था जिसकी राजधानी कपिलवस्तु थी । शाक्य गणराज्य के उत्तर में हिमालय पर्वत, पूर्व में रोहिणी नदी तथा दक्षिण और पश्चिम में राप्ती नदी स्थित थी । कपिलवस्तु की पहचान नेपाल में स्थित आधुनिक तिलौराकोट से की जाती है। कपिलवस्तु के अतिरिक्त इस गणराज्य में अन्य अनेक नगर थे-चातुमा, सामगाम, खोमदुस्स, सिलावती, नगरक, देवदह, सक्कर आदि। शाक्य गणराज्य में लगभग 80 हजार परिवार थे। शाक्य लोग अपने रक्त पर बड़ा अभिमान करते थे और इसी कारण वे अपनी जाति के बाहर वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित नहीं करते थे। गौतम बुद्ध का जन्म इसी गणराज्य में हुआ था। बुद्ध से सम्बन्धित होने के कारण इस गणराज्य का महत्व काफी बढ़ गया। किन्तु राजनैतिक शक्ति के रूप में शाक्य गणराज्य का कोई महत्व नहीं था और यह कोशल राज्य की अधीनता स्वीकार करता था।![]() |
(koli) koliya or Shakya Raja |
रामगाम (रामग्राम) के कोलिय- यह शाक्य गणराज्य के पूर्व में स्थित था। दक्षिण में यह गणराज्य सरयू नदी तक विस्तृत था । शाक्य और कोलिय राज्यों के बीच रोहिणी नदी बहती थी। दोनों राज्यों के लोग सिंचाई के लिए इसी नदी के जल पर निर्भर करते थे। नदी के जल के लिए उनमें प्रायः संघर्ष भी हो जाता था। एक बार गौतम बुद्ध ने ही इसी प्रकार के एक संघर्ष को शान्त किया था। कोलिय गण के लोग अपनी शक्ति के लिए प्रसिद्ध थे। कोलियों की राजधानी रामग्राम की पहचान वर्तमान गोरखपुर जिले मे स्थित रामगढ़ ताल से की गयी है।
गणरज्यो की शासन पद्धति
गराज्यो क शासन पद्धति के विषय में हमें बहुत कम जानकारी है । इतना स्पष्ट है कि गण की कार्यपालिका का अध्यक्ष एक निर्वाचित पदाधिकारी होता था जिसे राजा कहा जाता था । सामान्य प्रशासन की देख-भाल के साथ-साथ गणराज्य में आन्तरिक शान्ति एवं सामंजस्य बनाये रखना उसका एक प्रमुख कार्य था। अन्य पदाधिकारियों में उपराजा (उपाध्यक्ष), सेनापति, भाण्डागारिक (कोषाध्यक्ष) आदि प्रमुख थे। परन्तु राज्य की वास्तविक शक्ति एक केन्द्रीय समिति अथवा संस्थागार में निहित होती थी। इस समिति के सदस्यों की संख्या काफी बड़ी होती थी। बुद्धकालीन प्रमुख गणराज्य कोन कोन से थे ?
कपिल वस्तु के शाक्य।
अल्लकय बुली।
केसपुत्र के कालाम।
रामग्राम के कोलिय।
सुसभागिरि के भाग।
पावा के भल्ल।
कुशी नारा के मल्ल।
यिप्पलिवन के मोरिय।
मिथिला के विदेइ ।
वैशाली के लिच्छवि।


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