भगवान बुद्ध की अस्थियों को कितने भागों में और किन लोगों म ेंबांटा गया उन लोगों की पूर्ण जानकारी


        कोलिय शाक्य युवराज सिद्धार्थ गौतम बुद्ध 

भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण (देहावसान) के बाद, उनके शरीर के अवशेषों (अस्थियों/धातुओं) को लेकर विभिन्न राज्यों और गणराज्यों के प्रतिनिधियों के बीच विवाद उत्पन्न हो गया था। इस स्थिति को संभालने के लिए, द्रोण नामक एक ब्राह्मण ने हस्तक्षेप किया और बुद्ध की पवित्र अस्थियों को शांतिपूर्ण ढंग से आठ भागों में विभाजित किया।
इसके बाद, इन आठ भागों को विभिन्न शासकों और समुदायों को सौंप दिया गया, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में इन अवशेषों पर स्तूपों का निर्माण किया, ताकि अनुयायी उनकी पूजा कर सकें।
यहाँ उन लोगों की जानकारी दी गई है जिन्हें बुद्ध की अस्थियाँ मिलीं:
 * मगध के अजातशत्रु (राजा):
   * जानकारी: मगध के शक्तिशाली हर्यक वंशीय राजा, जिन्होंने अपने पिता बिंबिसार की हत्या की थी। वे बुद्ध के समकालीन थे और बाद में बुद्ध के अनुयायी बने। उन्हें बुद्ध की अस्थियों का एक बड़ा हिस्सा प्राप्त हुआ और उन्होंने राजगृह (राजगीर) में एक स्तूप बनवाया।
 * वैशाली के लिच्छवि (गणराज्य):
   * जानकारी: वैशाली वज्जि संघ का सबसे प्रमुख और शक्तिशाली गणराज्य था, जिसे दुनिया के पहले ज्ञात गणतंत्रों में से एक माना जाता है। लिच्छवि एक कुलीन और योद्धा समुदाय थे। उन्हें भी बुद्ध की अस्थियों का एक भाग मिला और उन्होंने वैशाली में एक स्तूप का निर्माण किया।
 * कपिलवस्तु के शाक्य (गणराज्य):
   * जानकारी: शाक्य गणराज्य वह स्थान था जहाँ बुद्ध का जन्म (लुम्बिनी, जो कपिलवस्तु के निकट था) हुआ था। शाक्य बुद्ध के अपने वंश के लोग थे। उन्हें बुद्ध की अस्थियों का एक भाग प्राप्त हुआ और उन्होंने कपिलवस्तु में एक स्तूप का निर्माण किया।
 * कुशीनगर के मल्ल (गणराज्य):
   * जानकारी: मल्ल गणराज्य दो प्रमुख शाखाओं (कुशीनगर और पावा) में बंटा हुआ था। कुशीनगर वह स्थान था जहाँ बुद्ध का महापरिनिर्वाण हुआ था। मल्लों ने ही बुद्ध के शरीर का अंतिम संस्कार किया था और उन्हें अस्थियों का एक भाग मिला, जिस पर उन्होंने कुशीनगर में एक स्तूप बनवाया।
 * पावा के मल्ल (गणराज्य):
   * जानकारी: मल्ल गणराज्य की दूसरी शाखा पावा में थी। उन्हें भी बुद्ध की अस्थियों का एक भाग मिला और उन्होंने पावा में एक स्तूप का निर्माण किया।
 * अल्लकप्पा के बुली (गणराज्य):
   * जानकारी: यह एक छोटा गणराज्य था, जिसके बारे में ऐतिहासिक जानकारी अपेक्षाकृत कम है। उन्हें भी बुद्ध की अस्थियों का एक भाग मिला, और उन्होंने अपने क्षेत्र में एक स्तूप का निर्माण किया।
 * रामग्राम के कोलिय (गणराज्य):
   * जानकारी: कोलिय गणराज्य बुद्ध की माता मायादेवी और पत्नी यशोधरा का पैतृक गणराज्य था, अर्थात बुद्ध का ननिहाल पक्ष। उन्हें भी बुद्ध की अस्थियों का एक भाग मिला और उन्होंने रामग्राम में एक स्तूप बनवाया।
 * वेथादिपा के ब्राह्मण (व्यक्तिगत ब्राह्मण परिवार/समूह):
   * जानकारी: वेथादिपा एक स्थान था (जिसकी पहचान अनिश्चित है) जहाँ के एक ब्राह्मण परिवार या समूह को बुद्ध की अस्थियों का एक भाग प्राप्त हुआ था। उन्होंने भी अपने क्षेत्र में एक स्तूप बनवाया।
इन आठ मुख्य भागों के अलावा, द्रोण ब्राह्मण ने अस्थियों के विभाजन के बाद स्वयं के लिए कलश (अस्थियां जिस बर्तन में रखी गई थीं) और पिप्पलिवाहन के मोरिय को अंगार (अंतिम संस्कार की राख) का एक हिस्सा मिला, जिस पर उन्होंने भी अपने-अपने स्तूप बनवाए। इस प्रकार, कुल मिलाकर दस स्तूप बने थे।
बाद में, सम्राट अशोक ने (तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में) इनमें से अधिकांश मूल स्तूपों को खुलवाकर, अस्थियों को छोटे-छोटे भागों में विभाजित किया और अपने साम्राज्य भर में हजारों स्तूपों का निर्माण करवाया, जिससे बौद्ध धर्म का व्यापक प्रसार हुआ।

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