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HISTORY

कोली देशमुख जावजी बाम्बले जिन्होंने 1770 में मराठों को हरा कर उनके किले जीते थे कौन थे ये राजा क्या है सच 🤔

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कोली योद्धाओं में एक ऐसे महान योद्धा जो कोली जाति से है ये थे                  कोली देशमुख जावजी बाम्बले  1770 में कोली देशमुख जावजी बाम्बले ने मराठों को हराकर मराठा साम्राज्य से पुणे का लोहागढ़ किला, भैरोगढ़ किला, शिदगढ़ किला, कोटा किला समेत ठाणे के कई अन्य किले, नासिक का अलंग किला ही नहीं, बल्कि अहमदनगर में रतनगढ़ और मदनगढ़ किले भी जीत लिए थे। Javji Bamble: Koli deshmukh of Maval, Koli Mansabdar of Maratha empire जावजीराव हीराजीराव बाम्बले (जिन्हें जीवाजी बाम्बले के नाम से भी जाना जाता है) मराठा साम्राज्य में राजूर सूबे के कोली मनसबदार, 60 गाँवों के कोली देशमुख और बाम्बले वंश के कोलियों के सरदार थे। उनका परिवार बहमनी सल्तनत के समय से ही जागीरदार रहा था। अपने पिता हीराजी बाम्बले की मृत्यु के बाद, वे अपने पिता के उत्तराधिकारी बने। 1760 में जावजी बाम्बले ने मराठा साम्राज्य के पेशवा माधवराव के विरुद्ध विद्रोह कर दिया। विद्रोह का कारण यह था कि जावजी बाम्बले को उनके पिता की जागीर और उपाधि नहीं दी गई थी, जिसके कारण जावजी ने पेशवा ...

भगवान बुद्ध के समय में कौन कौन से महाजनपद व स्वतन्त्र राज्य थे कौन कहा शासन करता थे ?

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       भारत के 16 महाजनपद के नाम इस चित्र में है  भगवान बुद्ध के समय (लगभग 6वीं शताब्दी ईसा पूर्व) भारत में 16 महाजनपद थे। इनमें से कुछ राजतंत्र थे जहाँ राजा शासन करते थे, और कुछ गणराज्य या संघ थे जहाँ कई प्रमुखों या कुलीनों द्वारा शासन किया जाता था। यहाँ 16 महाजनपदों के नाम और उनके शासन की प्रकृति दी गई है:  * काशी:    * राजधानी: वाराणसी।    * शासन: यह एक राजतंत्र था। बुद्ध के समय तक यह अक्सर कोसल और मगध के प्रभाव में रहा। बिंबिसार के समय में काशी का एक भाग दहेज में मगध को मिला था।  * कोसल:    * राजधानी: श्रावस्ती (उत्तरी कोसल), कुशावती (दक्षिणी कोसल)। अयोध्या और साकेत भी महत्वपूर्ण शहर थे।    * शासन: यह एक राजतंत्र था। बुद्ध के समकालीन राजा प्रसेनजित थे, जो काफी शक्तिशाली थे और बुद्ध के मित्र थे। कोसल का मगध के साथ कई बार संघर्ष हुआ।  * अंग:    * राजधानी: चंपा।    * शासन: यह एक राजतंत्र था। बुद्ध के समय में इसे मगध के राजा बिंबिसार ने जीतकर अपने साम्राज्य में मिला लिया था। ...

भगवान बुद्ध की अस्थियों को कितने भागों में और किन लोगों म ेंबांटा गया उन लोगों की पूर्ण जानकारी

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        कोलिय शाक्य युवराज सिद्धार्थ गौतम बुद्ध  भगवान बुद्ध के महापरिनिर्वाण (देहावसान) के बाद, उनके शरीर के अवशेषों (अस्थियों/धातुओं) को लेकर विभिन्न राज्यों और गणराज्यों के प्रतिनिधियों के बीच विवाद उत्पन्न हो गया था। इस स्थिति को संभालने के लिए, द्रोण नामक एक ब्राह्मण ने हस्तक्षेप किया और बुद्ध की पवित्र अस्थियों को शांतिपूर्ण ढंग से आठ भागों में विभाजित किया। इसके बाद, इन आठ भागों को विभिन्न शासकों और समुदायों को सौंप दिया गया, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में इन अवशेषों पर स्तूपों का निर्माण किया, ताकि अनुयायी उनकी पूजा कर सकें। यहाँ उन लोगों की जानकारी दी गई है जिन्हें बुद्ध की अस्थियाँ मिलीं:  * मगध के अजातशत्रु (राजा):    * जानकारी: मगध के शक्तिशाली हर्यक वंशीय राजा, जिन्होंने अपने पिता बिंबिसार की हत्या की थी। वे बुद्ध के समकालीन थे और बाद में बुद्ध के अनुयायी बने। उन्हें बुद्ध की अस्थियों का एक बड़ा हिस्सा प्राप्त हुआ और उन्होंने राजगृह (राजगीर) में एक स्तूप बनवाया।  * वैशाली के लिच्छवि (गणराज्य):    * जानकार...

भगवान श्री राम के पूर्वज प्राचीन राजा मान्धाता की कथा:

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Suryvanshi Koli Raja Mandhata प्राचीन   राजा मान्धाता(Mandhata)   की कथा, मोहनजो दारो के पुरातात्विक निष्कर्ष   5000-3000   ईसा पूर्व के हैं। वहां के पत्थर के शिलालेखों में उनके राज्यों में महान कोली राजाओं और प्रशासन की उनकी पंचायती पद्धति का वर्णन है। महान राजा मान्धाता के संदर्भ में कई बार और उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं, वीरता, और यज्ञ के कई प्रकाशनों में वर्णित हैं। इक्ष्वाकु सूर्यवंश: राजा मान्धाता के बारे मे अनुमान है कि वे लगभग दस हजार साल पहले जीवित थे। उसके बाद श्री राम, श्री कृष्ण और भगवान बुद्ध जैसी महान आत्माओं का जन्म हुआ। फिर भी राजा मान्धाता की उपलब्धियों की महानता ऐसी थी कि एक सांसारिक भाषाप्रकार इस दिन सार्वभौमिक उपयोग में आया, जब दूसरों से यह पूछने की तुलना की गई  की क्या वह  मान्धाता(Mandhata)  की तरह महान थे? ’मंधाता की तुलना सूर्यवंश में  सबसे चमकीले तारे के  रूप में की गई है और उनका जन्म हुआ था ब्रह्मा की 15 वीं पीढ़ी में।  महान मनु  के बाद  10  वीं पीढ़ी में   मान्धाता(Mandhata)  हुये ...

भारत के प्राचीन क्षत्रिय कोली/शाक्य राजवंश का इतिहास Zee Tv पर भी बताया जा रहा है कोली एक स्वर्ण जाति हे इसका प्रमाण अब सीरियल में भी दिखाया गया |

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             zee tv serial Gautam Budh  ( king Sidharth Goutam ) ( कपिलवस्तु के शाक्य   - यह गणराज्य नेपाल की तराई में स्थित था जिसकी राजधानी कपिलवस्तु थी । शाक्य गणराज्य के उत्तर में हिमालय पर्वत, पूर्व में रोहिणी नदी तथा दक्षिण और पश्चिम में राप्ती नदी स्थित थी । कपिलवस्तु की पहचान नेपाल में स्थित आधुनिक तिलौराकोट से की जाती है। कपिलवस्तु के अतिरिक्त इस गणराज्य में अन्य अनेक नगर थे-चातुमा, सामगाम, खोमदुस्स, सिलावती, नगरक, देवदह, सक्कर आदि। शाक्य गणराज्य में लगभग 80 हजार परिवार थे। शाक्य लोग अपने रक्त पर बड़ा अभिमान करते थे और इसी कारण वे अपनी जाति के बाहर वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित नहीं करते थे। गौतम बुद्ध का जन्म इसी गणराज्य में हुआ था। बुद्ध से सम्बन्धित होने के कारण इस गणराज्य का महत्व काफी बढ़ गया। किन्तु राजनैतिक शक्ति के रूप में शाक्य गणराज्य का कोई महत्व नहीं था और यह कोशल राज्य की अधीनता स्वीकार करता था।                                     ...

क्षत्रिय सूर्यवंशी कोली समाज ने अपने समाज के इतिहास पर प्रकाश डाला

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 क्षत्रिय सूर्यवंशी कोली समाज ने   अपने समाज के इतिहास पर  प्रकाश डाला  देखें यूट्यूब के इस चैनल पर  राजस्थान में सूर्यवंशी कोली राजपूत इष्ठदेव राजा मांधाता प्रकट उत्सव देवगांव से वीर प्रतापी राजा श्री मांधाता महाराज जी की जयंती बड़े ही हर्षोल्लास और धूमधाम मनाई इसके लिए सूर्यवंशी कोली समाज विकास एवम् सामूहिक विवाह समित भीलवाडा अध्यक्ष श्री राम चंद्र फतेहपुरिया एव समस्त कार्यकारिणी द्वारा *देवगांव आयोजन समिति के समस्त कार्यकारिणी सदस्यों और वहा के समस्त समाज बंधुओ का बहुत-बहुत आभार।* जिनके कारण आज हमे महापुरुषों को जानने का अवसर मिला। इसी के साथ टोंक, टोड़रायसिंह, जुनिया, केकडी, साखना, सूर्यवंशी कोली समाज के ई ष्ठदेव  सूर्यवंशी राजा मान्धाता महाराज भगवान राम के पूर्वज हैं ये राजा मान्धता

कोली क्षत्रिय जाति है हाईकोर्ट ने दिया फैसला कोरी जैसा अनुसूचित दर्जा नही है इस जाति को ?

                       इलाहाबाद हाईकोर्ट  कोली और कोरी दोनो अलग अलग जाति है । कोली क्षत्रिय जाति है। कोरी  कोइरी अलग हैं इनसे। कोलिय या कोली को अनुसूचित जाति का दर्जा नही मिलेगा इस बात को कोर्ट ने भी अपने फैसले में सुना दिया था - इलाहाबाद हाईकोर्ट    ये है वजह देखिए इस लिए समाज अलग अलग श्रेणी में है ? कभी भी समाज को शिक्षा रोजगार की ओर क्यू नही ले गई सरकार क्या था कारण देखे ?   कोली समाज को अलग अलग राज्य में वहा के उस वक्त की तत्कालीन सरकार के शासन काल में अपने  निजी लाभ के लिए  प्राचीन क्षत्रिय कोली वंश का इतिहास को  दुनिया के सामने नही दिखाया गया इतिहास के पन्नो में देखा जाए तो  कोली समाज भारत की एक प्राचीन क्षत्रिय जाति जिसके कई प्रमाण कई वेदों पुराणों शिलालेखो में वर्णित है पर फिर भी इन्हे कमजोर करने के लिए अलग अलग कैटेगरी में बाट दिया गया  । आखिर क्या हुआ? कैसे गया कोली समाज का ये मामला हाईकोर्ट में  और कोर्ट ने क्या फैसला किया देखे ?  इलाहाबाद .. ...